अडानी ग्रुप का 6,600 मेगावाट का मेगा-प्रोजेक्ट और गुजरात में ग्रीन एनर्जी नियमों पर अहम अपडेट

भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर से दो बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। एक तरफ गौतम अडानी के नेतृत्व वाले समूह ने महाराष्ट्र में बिजली आपूर्ति का एक बड़ा टेंडर अपने नाम किया है, तो दूसरी तरफ गुजरात के ऊर्जा नियामक ने ग्रीन एनर्जी से जुड़े नियमों में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। ये दोनों ही खबरें देश के ऊर्जा भविष्य और बाजार के लिहाज से काफी मायने रखती हैं।

महाराष्ट्र के साथ लंबी अवधि का करार अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) ने महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (एमएसईडीसीएल) के साथ कुल 6,600 मेगावाट बिजली सप्लाई का समझौता किया है। इस विशाल प्रोजेक्ट के तहत 5,000 मेगावाट की सौर ऊर्जा सीधे गुजरात के कच्छ जिले में स्थित खावड़ा से सप्लाई की जाएगी। आपको बता दें कि खावड़ा में ही दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क विकसित किया जा रहा है।

थर्मल और सोलर ऊर्जा का मिला-जुला टेंडर इस बड़े सौदे का दूसरा हिस्सा थर्मल पावर से जुड़ा है। देश की सबसे बड़ी प्राइवेट थर्मल पावर जनरेटिंग कंपनी अडानी पावर लिमिटेड (एपीएल) इसी करार के तहत 1,600 मेगावाट के नए अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्रोजेक्ट से बिजली देगी। दरअसल, एमएसईडीसीएल ने एक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया आयोजित की थी। इसके टेंडर के नियम कुछ ऐसे थे कि अडानी पावर को थर्मल के साथ-साथ सौर ऊर्जा के लिए भी एक साथ बोली लगाने का मौका मिल गया, जिसकी आपूर्ति समूह की ही किसी दूसरी कंपनी के जरिए की जा सकती थी। इस सफलता पर अदाणी ग्रीन के कार्यकारी निदेशक सागर अडानी ने साफ किया कि उनका मुख्य लक्ष्य भारत के ग्रीन एनर्जी ट्रांसिशन को रफ्तार देना है। कंपनी अपने 50 गीगावाट के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उनके पास मजबूत सप्लाई चेन और सुरक्षित साइट्स मौजूद हैं।

शेयर बाजार में हलचल और आगे की उम्मीदें कंपनी के लिए पिछला सप्ताह शेयर बाजार के मोर्चे पर थोड़ा निराशाजनक रहा था। शुक्रवार को अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयर 1.37 फीसदी लुढ़क कर 1,787 रुपये पर बंद हुए थे। बाजार में यह गिरावट हिंडनबर्ग की उस नई रिपोर्ट के बाद आई, जिसमें दावा किया गया था कि स्विस बैंकों में अडानी के करीब 10 अरब डॉलर फ्रीज कर दिए गए हैं। हालांकि, इस बड़ी डील के हाथ लगने के बाद बाजार विशेषज्ञों को पूरी उम्मीद है कि सोमवार को कंपनी के शेयरों में एक बार फिर तगड़ा उछाल देखने को मिलेगा।

गुजरात में ग्रीन एनर्जी बैंकिंग शुल्क पर नया प्रस्ताव चूंकि अडानी का यह विशाल सोलर प्रोजेक्ट गुजरात में ही है, इसलिए राज्य के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के नीतिगत नियम भी अहमियत रखते हैं। इसी बीच, गुजरात विद्युत नियामक आयोग (जीईआरसी) ने एक नया ड्राफ्ट जारी किया है। आयोग ने राज्य के ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस फ्रेमवर्क के तहत मौजूदा 1.50 रुपये प्रति यूनिट के बैंकिंग चार्ज को 30 जून 2026 तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव 11 मार्च को जारी किए गए चौथे संशोधन (ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस के नियम और शर्तें) का हिस्सा है। हितधारक और आम जनता 27 मार्च तक इस ड्राफ्ट पर अपने सुझाव दे सकते हैं।

बैंकिंग चार्ज का गणित और आगे का अध्ययन एनर्जी बैंकिंग एक तरह की सुविधा है जो रिन्यूएबल ऊर्जा उत्पादकों को अपनी अतिरिक्त बिजली ग्रिड में डालने और जरूरत पड़ने पर वापस निकालने की सहूलियत देती है। इस सुविधा के बदले जो फीस चुकानी होती है, उसे ही बैंकिंग चार्ज कहा जाता है। अगर यह नया प्रस्ताव पास हो जाता है, तो 2024 में लागू हुए मुख्य नियमों के दो प्रावधानों में बदलाव होगा। असल में, जीईआरसी ने पहली बार फरवरी 2024 में इस 1.50 रुपये के शुल्क को तय किया था। इसकी मियाद शुरू में केवल 30 सितंबर 2024 तक ही थी, लेकिन बाद में इसे कई बार बढ़ाया गया। आयोग का कहना है कि नए और उचित शुल्क तय करने के लिए एक विस्तृत अध्ययन की जरूरत है। ग्रिड संचालन और एनर्जी बैंकिंग से जुड़े भारी-भरकम डेटा का विश्लेषण अभी चल ही रहा है। इसीलिए जब तक कोई नई कार्यप्रणाली फाइनल नहीं हो जाती, तब तक पुराने चार्ज को ही अंतरिम व्यवस्था के तौर पर लागू रखा जाएगा।

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